भारत में बेरोजगारी आधुनिक कारण–रोजगार कैसे मिलेगा

दुनिया भर में नई तकनीक कई पेशों को खत्म कर रही है. ऐसे में उस भारत का क्या होगा जिसकी आधी आबादी युवा है. आखिर क्या वजह है कि मोदी भी नौकरियां पैदा करने के मामले में नाकाम साबित हुए.अगर ऐसे ही चलता रहा तो सोचिये की आज से 25 साल बाद देश की क्या हालत होगी | चलिए जन्जते इसे कुछ मुख्य बिंदु के विषय में -

  1. रोजगार सहायता – 
  2. आर्थिक सर्वेक्षण-
  3. रोजगार का सवाल –
  4. रोजगार योजना-
  5. छात्र की योग्यता –
  6. जॉब क्यों नहीं मिलता –(Most Imp)

रोजगार सहायता – दो शब्द

महान अर्थशास्त्री थॉमस राबर्ट माल्थस ने लिखा था, "प्रकृति की मेज सीमित संख्या में अतिथियों के लिए सजाई गई है. जो बिना बुलाए आएंगे, वो भूखों मरेंगे.” लेकिन यदि हम इसे दूसरी तरह से देखें तो धरती पर जन्म लेने वाले व्यक्ति का मुंह भले ही एक हों किन्तु हाथ दो होते हैं और यदि ये हाथ सही ढंग से उत्पादन के कार्य में लगें तो न सिर्फ अपना पेट भर सकते हैं बल्कि समाज के लिए भी कुछ दे सकते हैं. लेकिन प्रश्न सिर्फ रोजगार का ही नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण रोजगार का भी है. यदि भारत में रोजगार की औपचारिक स्थिति पर नजर डालें, यानी ऐसा रोजगार जहां कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के उपाय उपलब्ध हैं तो स्थिति और भयावह है |

आर्थिक सर्वेक्षण-

साल 2018 के आर्थिक सर्वेक्षण को देखें तो भारत में औपचारिक क्षेत्र में रोजगार की संख्या करीब छह करोड़ है. इसके अलावा रक्षा क्षेत्र को छोड़कर करीब डेढ़ करोड़ लोग सरकारी क्षेत्रों में कार्यरत हैं. यानी करीब साढ़े सात करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें औपचारिक तौर पर रोजगार मिला हुआ है. जबकि गैर कृषि क्षेत्र में रोजगार पाए लोगों की संख्या करीब 24 करोड़ है.

रोजगार का सवाल –

जहां तक औपचारिक क्षेत्र में रोजगार यानी नौकरियों का सवाल है तो सरकारी दावे कतई खरे नहीं उतरते. पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा सरकारी नौकरियां देने वाले रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड और स्टाफ सेलेक्शन कमीशन में या तो नौकरियां आईं नहीं और आईं भी तो विवादों के चलते लोगों को नौकरियां मिली नहीं. जानकारों के मुताबिक, इन केंद्रीय संस्थाओं और राज्यों में ऐसी संस्थाओं और लोक सेवा आयोगों के जरिए लाखों की संख्या में लोगों को नौकरियां मिलती थीं.

रोजगार योजना -

वहीं सरकार का दावा है कि वो स्टार्ट अप इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया जैसी तमाम योजनाओं के जरिए करीब सत्तर- अस्सी लाख नौकरियां पैदा कर रही है लेकिन एक तो इन नौकरियों को औपचारिक रोजगार जैसा दर्जा नहीं दिया जा सकता, दूसरे जिस तरह से देश में बेरोजगार युवाओं की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए यह पर्याप्त भी नहीं है.

छात्र की योग्यता -

बेरोजगार घूमती इंजीनियरों की फौज अगर कुशल नहीं है तो यह शिक्षा नीति की असफलता है न कि छात्रों की. आखिर कॉलेजों, विश्वविद्यालयों से निकलने वाला एक स्नातक छात्र यदि अकुशल या अयोग्य है तो इसमें दोष किसका है?” उनका आरोप है कि रोजगार के प्रश्नों को कुशलता और अकुशलता के मिथक गढ़कर उन्हें दूसरी दिशा में मोड़ने का प्रयास किया जाता है ताकि सरकारी नीतियों की ओर उठने वाली उंगली, खुद नौकरी और रोजगार मांगने वालों की ओर ही उठने लगें.

कृषि क्षेत्र में-

कृषि क्षेत्र में ज्यादातर श्रमिक अल्प रोजगार की अवस्था में हैं यानी उनकी संपूर्ण कार्य क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता है. भारत में रोजगार के कोई निश्चित आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी ऐसा माना जाता है कि देश की कुल श्रम शक्ति का एक तिहाई अल्प रोजगार की अवस्था में है. विशेषज्ञों का कहना है कि ढांचागत बाधाएं, जटिल श्रम कानून और नौकरशाही ने प्रगति के रास्ते को रोक रखा है. विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कई वर्ष से देश की अर्थव्यवस्था में उत्पादन क्षेत्र के योगदान में ज्यादा बदलाव नहीं आया है |

जॉब क्यों नहीं मिलता –

दोस्तों आपको यह बताने की जरूरत नहीं हैं भारत में बेरोजगारी कितनी अधिक हैं कई डिग्री होने के बाद भी उन्हें कोई जॉब नहीं मिलता हैं क्यों ? 

  1. जो प्रतिभा उस जॉब के लिए चाहिए होती हैं,वो हमारे में होती ही नहीं हैं और हम उसी के बारे में सोचते रहते हैं और उसी के लिए काम करते हैं !!
  2. हमे किसी एक विषय में एक्सपर्ट बनना होगा चाहे वो कोई भी काम क्यों न हो |
  3. अगर हम सरकारी नौकरी की बात करें तो सबसे जरुरी बात तो यह हैं हमारा गोल दोस्तों या चाचा के लड़के के सपने के अनुसार होता हैं जो की बिलकुल सही नहीं हैं आपको तैयारी अपने रूचि और प्रतिभा के अनुसार करनी चाहिए !
  4. किसी भी एक एग्जाम की तयारी करें कभी NEET, तो कभी UPSC बार बार अपने लाइन को बदलना नहीं चाहिये |
  5. सरकारी नौकरी के आलावा भी लाखो नौकरी ऐसी हैं जिससे आप अपना करियर बना सकते हैं|

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Copyright © रोजगार सहायता: Rojgar Sahayta